दोस्तो अगर आपने स्मार्टफोन या कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया है, तो जाहिर सी बात है की आप सॉफ्टवेयर से परिचित होंगे. यदि आपको पता नही कीे सॉफ्टवेयर होता क्यां है तो जाने अनजाने मे आपने सॉफ्टवेयर का उपयोग अवश्य किया होगा.

आजकल स्मार्टफोन और कम्प्यूटर के लिए इंटरनेट पर बहुत से ऐसे software मौजूद है जो हमारे और आपके कार्यो को आसान बना देते है.

सॉफ्टवेयर हमारे लिए बहुत उपयोगी होते है. आज हम लोग अपने बहुत से कार्यों के लिए सॉफ्टवेयर पर निर्भर हैं. सॉफ्टवेयर के प्रयोग से हम अपना कीमती समय तो बचाते ही हैं और कार्यों को अच्छे ढंग से भी कर पाते हैं.

सॉफ्टवेयर के जरिए हम बहुत से काम बहुत कम समय में कर पाते हैं. यह हमारे लिए तो उपयोगी है ही लेकिन सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों तथा लोगों के लिए कमाई का एक साधन भी है.

सॉफ्टवेयर निर्माता, कंपनियां और यूजर्स इनसे बहुत अच्छी कमाई भी करते हैं. तो चलिए जानते है सॉफ्टवेयर का अर्थ.

software kya hai

सॉफ्टवेयर किसे कहते हैं?

सॉफ्टवेयर निर्देशों का एक संग्रह होता है जो उपयोगकर्ता को कंप्यूटर तथा हार्डवेयर को कार्य करने में सक्षम बनाता है. सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब आपके पास हार्डवेयर मौजूद हो. सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर के ऑपरेट करना नामुमकिन के समान है.

उदाहरण के लिए अगर आप अपने कंप्यूटर पर इंटरनेट चलाना चाहते हैं तो सर्वप्रथम आपके कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम होना चाहिए कंप्यूटर में प्रयोग होने वाले कुछ प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज, लिनक्स आदि हैं.

इसके अलावा आपके कंप्यूटर में इंटरनेट चलाने के लिए एक वेब ब्राउज़र होना चाहिए वेब ब्राउज़र एक सॉफ्टवेयर होता है जिसकी मदद से आप कंप्यूटर को निर्देश दे सकते हैं और अपना आउटपुट ले सकते हैं.

ऐसे ही अगर आप अपने मोबाइल से फोटो क्लिक करना चाहते हैं तो आपके मोबाइल में कैमरा का सॉफ्टवेयर होना आवश्यक है. जिसके लिए जरूरी है मोबाइल का कैमरा, जो कि एक हार्डवेयर होता है जिसका प्रयोग कर हम फोटो क्लिक कर सकते हैं.

सॉफ्टवेयर की उपयोगिता

सॉफ्टवेयर हमारे लिए बहुत ज्यादा उपयोगी है इसके उपयोगों का बखान करना आसान नहीं है.

अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग सॉफ्टवेयरों का विभिन्न प्रयोग किया जाता है.

सॉफ्टवेयर का उपयोग हर दूसरे स्थान पर किया जाता है जहां अधिकांश कंप्यूटरों का यूज़ होता है. इसके अलावा अलग-अलग डिवाइसों के लिए अलग-अलग प्रकार के सॉफ्टवेयर बनाए जाते हैं जिससे उन डिवाइस को ऑपरेट किया जा सकता है.

उदाहरण के लिए जैसे आप सभी ATM में जाते हैं तो वहां आप देखते हैं कि एक डिस्प्ले लगा होता है. जैसे ही आप उसमें अपना एटीएम कार्ड डालते हैं डिस्प्ले पर कुछ चित्र आते हैं यह सब सॉफ्टवेयर के जरिए होता है इसके बाद आप बटन दबाकर सॉफ्टवेयर को ऑपरेट करते हैं.

जिससे मशीन में कुछ सूचनाएं जाती हैं और मशीन आउटपुट देती है और इस प्रकार मशीन को कार्य करने की सूचना प्राप्त होती है.

इसके अलावा शिक्षण संस्थानों में भी सॉफ्टवेयर का अत्यधिक प्रयोग किया जा रहा है. आज विभिन्न platforms के लिए अनेकों सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल कोई भी व्यक्ति शिक्षा प्राप्त करने के लिए कर सकता है.

इसी के साथ सॉफ्टवेयर का व्यावसायिक प्रयोग भी बहुत अधिक मात्रा में हो रहा है. सॉफ्टवेयर का प्रयोग अलग-अलग व्यवसायों में किया जा रहा है.

उदाहरण के लिए फिल्म निर्माण में संगीत निर्माण में फोटो एडिट करने में बिल बनाने में इसके अलावा और भी अन्य क्षेत्रों में इसका प्रयोग किया जाता है.

सॉफ्टवेयर के प्रकार

वैसे तो सॉफ्टवेयर के अनेको प्रकार होते है लेकिन सॉफ्टवेयर के प्रमुख चार प्रकार निम्नलिखित है.

1. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर वह सॉफ्टवेयर होते हैं जिनके जरिए हम किसी भी कार्य को कर सकते हैं. यह कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का सबसे कॉमन प्रकार है इसे end user प्रोग्राम भी कहा जाता है.

क्योकि इसके द्वारा उपयोगकर्ता सीधे आपना मनचाहा कार्य कर सकता है. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण MS WORD, PAINT, INTERNET EXPLORER, VIDEO PLAYER आदि है.

यदि आप इंटरनेट का इस्तेमाल करना चाहते है तो आप INTERNET EXPLORER का प्रयोग कर सीधे इंटरनेट से जुड़ सकते है.

2. सिस्टम सॉफ्टवेयर

सिस्टम सॉफ्टवेयर वह सॉफ्टवेयर होता है जिसके बिना कोई अन्य सॉफ्टवेयर आपके सिस्टम में इंस्टॉल नहीं किया जा सकता है.

सभी प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे कि Windows, Android, MAC OS, आदि सिस्टम सॉफ्टवेयर के अंदर आते हैं. इसी के अंदर आप एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को install कर सकते हैं.

3. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर आपके सिस्टम में मौजूद ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं. जो आपके कंप्यूटर के संसाधनों के प्रबंधन तथा सुरक्षा का कार्य करते हैं और यह हार्डवेयर के सीधे संपर्क में नहीं होते यूटिलिटी सॉफ्टवेयर को सर्विस प्रोग्राम भी कहा जाता है.

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के कुछ उदाहरण Disk Defragmenter, Antivirus सॉफ्टवेयर है, जिनका प्रयोग कंप्यूटर को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.

4. प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर

प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर कुछ विशेष प्रकार के सॉफ्टवेयर होते हैं, जिनका प्रयोग आम लोगों के द्वारा बहुत कम किया जाता है इनका प्रयोग ज्यादातर सॉफ्टवेयर डेवलपर या वेब डेवलपर ऑन द्वारा किया जाता है.

प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर की मदद से प्रोग्राम करके नए नए सॉफ्टवेयर बनाए जा सकते हैं जिन का उपयोग अलग-अलग प्रकार के कार्यों में किया जाता है. प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर के कुछ प्रमुख उदाहरण Flosum,UltraEdit,Buddy,Notepad++,आदि है.

सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है?

दोस्तों अभी तक आपने जाना कि सॉफ्टवेयर क्या होता है तथा इसके कितने प्रकार होते हैं लेकिन अब आप जानेंगे कि सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है.

किसी भी सॉफ्टवेयर को चलाने से पहले आपके पास उस सॉफ्टवेयर की फाइल होना आवश्यक है.

इसके बाद आप उस सॉफ्टवेयर की फाइल को अपने सिस्टम में इनस्टॉल करेंगे इंस्टॉल करने के बाद उस सॉफ्टवेयर की सारी फाइल्स आपके हार्ड डिस्क में save हो जाती हैं.

इसके बाद जैसे ही आप उस सॉफ्टवेयर को लॉन्च करते हैं तो हार्डवेयर में से फाइल आपके रैम में जाती हैं. इसके बाद रैम के द्वारा वह फाइलें प्रोसेसर में भेज दी जाती हैं जिसके बाद वह सॉफ्टवेयर लॉन्च होता है. इसके बाद सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता से इनपुट लेता है फिर इनपुट को प्रोसेस करने के बाद आपको आउटपुट प्राप्त होता है.

निष्कर्ष

तो साथियों यह लेख यही समाप्त होता है मुझे उम्मीद है सॉफ्टवेयर क्या है, इसके उपयोग और इसके प्रकारों के बारे में आपको जानकारी मिली होगी. अगर आपका इस लेख के संबंध में कोई सवाल है तो कमेंट में बताएं साथ ही जानकारी को शेयर करना ना भूलें.

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में एक कंप्यूटर टीचर हूँ और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री किया हुआ है. मुझे टेक्नोलॉजी से संबंधित चीजें बहुत ही दिलचस्प लगता है. इसी कंप्यूटर एडिशन ब्लॉग के जरिये में कंप्यूटर कोर्स को सरल तरीको से समझाने की कोसिस करती हूँ.

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